घर का भेदी लंका ढाये घर का भेदी लंका ढाये
व्यथित मन चूल्हा फूंकने में पड़ा है , जलती हुई लकड़ी धुएं के गुबार से निकले आसुओं व्यथित मन चूल्हा फूंकने में पड़ा है , जलती हुई लकड़ी धुएं के गुबार से ...
हुआ जन्म बेटी का घर में नहीं बधाई गीत हुए, पर वंशवेल बढ़ाने को देवी पूजन और यज्ञ हुए हुआ जन्म बेटी का घर में नहीं बधाई गीत हुए, पर वंशवेल बढ़ाने को देवी पूज...
घर का भेदी जो लंका ढाये वह दुश्मन से पहले सुन मारा जायेगा,. घर का भेदी जो लंका ढाये वह दुश्मन से पहले सुन मारा जायेगा,.
अब जगो और खोल दो गाँठ इनके सब काले धंधों की। अब जगो और खोल दो गाँठ इनके सब काले धंधों की।
तुम कितनी सुलझी हुई हो ना, जैसे की कोई रेशम का धागा, कितना भी करो हमेशा सुलझा। तुम कितनी सुलझी हुई हो ना, जैसे की कोई रेशम का धागा, कितना भी करो हमेशा सुलझा।